अरावली पर्वत पर अवैध खनन रोकने को जंग तेज
सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
नई दिल्ली/ जयपुर। अरावली पहाड़ियों के संरक्षण को लेकर सियासत और पर्यावरण बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अरावली से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए केंद्र और चार भाजपा शासित राज्यों को कटघरे में खड़ा किया है। अरावली पहाड़ियों पर अवैध खनन के विरोध में कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने 26 को पैदल मार्च का ऐलान किया है।
सचिन पायलट ने कहा कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली चारों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, साथ ही केंद्र में भी भाजपा सत्ता में है। ऐसे में अगर सभी चार इंजन मिलकर काम करें, तो सुप्रीम कोर्ट से आग्रह कर अरावली क्षेत्र को पूरी तरह संरक्षित किया जा सकता है। कांग्रेस नेता पायलट ने बताया कि अरावली पहाड़ियों को बचाने के लिए 26 दिसंबर को जयपुर में छात्र संगठन और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विशाल मार्च निकाला जाएगा। इसका उद्देश्य अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए जनसमर्थन जुटाना और सरकारों पर दबाव बनाना है।
एनसीआर का कवच है अरावली पहाड़ियां
पायलट ने आगाह किया कि अरावली पहाड़ियां एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं। यहां अवैध खनन और पर्यावरणीय दोहन के गंभीर नतीजे सामने आएंगे। इससे रेगिस्तान का विस्तार तेज होगा, प्रदूषण और जल संकट और गहराएगा तथा जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आज अरावली को बचाने में हम नाकाम रहे, तो आने वाली पीढ़ियों को हम क्या विरासत सौंपेंगे?
