सेक्युरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन के प्रमुख गैरी गेंस्टर का इस्तीफे का एलान
नई दिल्ली। भारत के जानेमाने उद्योगपति गौतम अडानी पर रिश्वत देने के लगे आरोपों से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों की जांच करे वाली अमेरिकी संस्था सेक्युरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (सीईसी) के प्रमुख गैरी गेंस्टर ने डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के वक्त पद छोड़ने की घोषणा की है। डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालेंगे। इस मामले पर बाइडेन प्रशासन ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा है कि भारत के साथ उसके संबंधों की नींव काफी मजबूत है और इस मामले से उन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
आधिकारिक तौर पर सीईसी के प्रमुख गेंस्टर का पांच का कार्यकाल 2026 में खत्म होगा, लेकिन बीते कुछ समय से व्हाइट हाउस में बदलाव के साथ ही इस संस्था के प्रमुख के भी बदल जाने का रिवाज है। गेंस्टर के कार्यकाल में सीईसी ने बाजार में ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम कदम उठाए। उन्होंने कॉरपोरेट घरानों की ओर से डिस्क्लोजर पर जोर दिया, लेकिन वह कई कानूनी पचड़े में उलझे रहे। उनके इस्तीफे के कुछ ही घंटे पहले सीईसी के एक नए नियम को खारिज कर दिया। अमेरिका का शेयर बाजार करीब 27 ट्रिलियन डॉलर का है। इस्तीफे को लेकर जारी बयान ने गेंस्टर कहा है कि सीईसी ने अपना लक्ष्य पूरा किया है। उसने बिना किसी डर या भय के अपने नियम लागू किए हैं। दरअसल, अमेरिकी संस्था सेक्युरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (सीईसी) ने अडानी पर रिश्वत देने और जालसाजी के आरोप लगाए हैं। ये आरोप गौतम अडानी और सात अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए हैं। इन आरोपों से दुनिया भर में हड़कंप मचा हुआ है। दुनिया के तमाम देशों में अडानी समूह के कारोबार हैं। ऐसे में कई देशों ने उनके साथ कारोबारी रिश्तों और प्रोजेक्ट पर विचार करने या रद्द करने तक की बात कही है। अडानी पर अमेरिकी एजेंसियों ने भारत में सौर बिजली का ठेका हासिल करने के लिए 26.5 करोड़ डॉलर (लगभग 2,200 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने का आरोप लगाया है। भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति अडानी तथा उनके भतीजे सागर अडानी सहित सात अन्य लोगों पर ये आरोप लगाए गए हैं। उधर, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन जीन पियरे ने कहा कि इस मामले पर हमारी नजर है। मैं यही कहूंगी कि दोनों देशों के लोगों के बीच के संबंध और हमारे द्विपक्षीय सहयोग से जुड़ा हुआ है।
दया पर जीने वाले भी दिखाने लगे आंख
नई दिल्ली। गौतम अडानी घूसकांड से क्या घिरे, बांग्लादेश अडानी ग्रुप को आंख दिखाने लगा। बांग्लादेश में अडानी ग्रुप का पावर डील यानी बिजली सौदा जांच के घेरे में आ गया है। बांग्लादेशी हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी एक्शन के बाद श्रीलंका को भी अडानी ग्रुप संग पावर डील को लेकर सतर्क रहना चाहिए। ढाका में एनर्जी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि अमेरिका में गौतम अडानी और अडानी ग्रुप के कई टॉप अफसरों के खिलाफ मुकदमा अडानी समूह और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बीच भविष्य की डील में एक अहम कारक बन सकता है। अडानी के खिलाफ अमेरिका में आपराधिक कार्यवाही ढाका में हाईकोर्ट के 1,600 मेगावाट के बिजली सौदे की जांच के आदेश के एक दिन बाद हुई है। इस डील के तहत अडानी ग्रुप अपने गोड्डा पावर प्लांट से बांग्लादेश को बिजली निर्यात करता है. मगर अब यह डील जांच के दायरे में है।
