लाठी-डंडे लेकर योजना के साथ आई थी करणी सेना
कई किलोमीटर दौड़ा वाहनों का काफिला और जेसीबी
मुकदमा दर्ज करने में लगे 12 घंटे से अधिक
उपद्रव पर अफसरों की चुप्पी से विपक्ष मुखर
केंद्र और राज्य सरकारों को भेजी गुप्त रिपोर्ट
कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

आगरा। सूबे के तेरतर्रार मुख्यमंत्री की मौजूदगी में राज्यसभा सांसद के आवास पर हमले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर12 किलोमीटर तक सड़कों पर लाठी-डंडे लेकर जेसीबी और वाहनों पर सवार सैकड़ों लोग निषेधाज्ञा तोड़कर शहर की लाइफ लाइन एमजी रोड पर कैसे पहुंचे, सांसद के आवास पर सुरक्षाबल तैनात होने के बाद भी हमला और उपद्रव कैसे हो गया। इतना ही नहीं बेखौफ हमलावरों ने बीच में आए पुलिसकमियों को लहूलुहान कर दिया। हमले में इंस्पेक्टर समेत आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों के चोटिल होने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर शिथिलता बरती जा रही है।
जिले में धार्मिक तथा समाजिक पर्व और उत्सवों को लेकर निषेधाज्ञा लागू है। ऐसे में बिना अनुमति के जुलूस और धरना प्रदर्शन पर रोक है। इसके बाद भी करणी सेना ने ऐलानिया अंदाज में कुबेरपुर से लेकर एमजी रोड तक जेसीबी और वाहनों के काफिले के साथ हाथों में लाठी-डंडे लेकर पहुंचे।
हमलावरों ने पुलिस को बैरियर समेत को 200 मीटर तक धकेल दिया। इसके बाद सांसद सुमन के घर पर हमला बोल दिया। उपद्रवियों के तेवर देखकर करीब 25 मिनट तक पुलिस असहाय नजर आई, इस दौरान हमलावरों ने खूब तांडव मचाया।
फोर्स आने पर हमलावरों को रोकने का प्रयास किया तो खाकीवर्दी वालों को निशाना बनाया, पुलिस इंस्पेक्टर, दरोगा और पुलिसकमियों को पीटा, पत्थर और कुर्सियां फेंकी। हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने लाठी जार्च कर उपद्रवियों को खदेड़ा और दो दर्जन से अधिक हमलावरों को हिरासत में लेने का दावा किया है। घटना के बाद पुलिस अधिकारी मीडिया के सामने आए, लेकिन तमाम सवालों पर गोल-मोल उत्तर दिए।
सांसद सुमन के घर हमले में खुफिया तंत्र फेल

आगरा। राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन के आवास पर करणी सेना के हमले के बाद पुलिस प्रशासन से लेकर शासन तक सकते में हैं। सेंट्रल और प्रदेश गुप्तचर शाखा ने देर रात अपनी-अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। सूत्रों का कहना है कि सांसद के घर हमले के मामले में फौरी तौर पर पुलिस और खुफियातंत्र के अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद करणी सेना और हिंदूवादी संगठनों ने राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बीते कई दिनों से सांसद सुमन के घर पर विरोध प्रदर्शन और जगह-जगह सुमन के पुतले फूंके जा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखकर पुलिस भी अलर्ट थी, खुफियातंत्र को भी लगाया गया था। इसके बाद भी थाना हरीपर्वत से चंद कदम दूर एमजी रोड स्थित सांसद सुमन के आवास पर 12 किलोमीटर लंबे जुलूस में पहुंचे करणी सेना के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हमला बोल दिया। सांसद के घर का दरवाजा तोड़ दिया, खिड़की के शीशे चकनाचूर कर दिए, घर के बाहर खड़े आधा दर्जन से अधिक वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुर्सी तोड़ दी, जो सामाने आया उसे मारपीट कर लहूलुहान कर दिया।
बेखौफ हमलावरों के हौसले इतने बुलंद थे कि मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर हरीपर्वत अलोक सिंह, कई दरोगा और पुलिसकर्मियों को भी खून से लथपथ कर दिया। करीब आधा घंटे के उपद्रव के बाद फोर्स एक्शन में आया और उपद्रवियों को खदेड़ने को बल प्रयोग किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुमन के आवास पर हमले की गंूजा सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली और लखनऊ में सुनाई देने लगी। सपा प्रमुख से लेकर तमाम राजनीतिक दलों ने हमले की निंदा कर योगी सरकार को आइना दिखाया। इसके बाद भी देर रात तक पुलिस की शिथिलता पूर्ण कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सांसद सुमन के आवास पर हमले को लेकर केंद्रीय और राज्य खुफिया तंत्र ने अपनी-अपनी भेज दी है। सूत्रों का कहना है कि सुमन के घर पर हमला और उपद्रव में शिथिलता को लेकर कई अधिकारियों के साथ खुफियातंत्र भी राडर पर आ गया है। शासन के एक्शन में आने पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
सांसद आवास पर जुटने लगा सपा का शीर्ष नेतृत्व

आगरा। सांसद सुमन के आवास पर हमले को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी विपक्ष को मुखर होने का मौका मिला है। विपक्ष दलित उत्पीड़न, पीडीए और कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार को घेर रही है।
गुरुवार को सांसद रामजीलाल सुमन के आवास पर करणी सेना के हमले के बाद सपा का शीर्ष नेतृत्व से लेकर सांसद समर्थक सुबह से ही जुटने लगे हैं। पार्टी के शीर्ष में शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव समेत सांसद और विधायक का कार्यक्रम तय है। इसके अतिरिक्त सांसद सुमन समर्थक,सपा के स्थानीय नेता और समर्थक सांसद के आवास जुटने लगे हैं। इसके साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी एक्शन में आ गए हैं। सांसद आवास पर पर्याप्त मात्रा में पुलिस के साथ पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। हर आने-जाने वाले और राजनीतिक नेताओं पर खुफियातंत्र सुरागरसी कर रहा है।
वहीं दलित सांसद सुमन के आवास पर हमले को लेकर विपक्ष सड़क से लेकर सांसद तक आवाज बुलंद करने की रणनीति बना चुका है। हमले को सपा ने पीडीएक और दलित को उत्पीड़न बता कर योगी सरकार की कानून व्यवस्थ और अफसरों की मंशा पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि उपद्रव के बाद भी मुकदमा दर्ज करने में पुलिस को कई घंटे लग गए।
कुबेरपुर आने से पहले कार्यकर्ताओं से इकट्ठा होने का किया था आह्वान
आगरा। कुबेरपुर आने से पहले क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र सिंह राणा (हरियाणा) ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो जारी किए थे। एक वीडियो में सांसद के बयान पर आक्रोश व्यक्त करते हुए आवास पर पहुंचने का एलान किया था। दूसरे वीडियो में कार्यकतार्ओं को एकजुट होने के लिए स्थान के बारे में बता रहे हैं। मंगलवार को जारी एक वीडियो में सांसद के बयान से परेशान होने की बात कही है। इसमें राणा सांगा पर दिए बयान पर आक्रोश व्यक्त किया है। इसमें ओकेंद्र सिंह राणा कह रहे हैं कि सब लोग इकट्ठा होकर सांसद के आवास पर जाएंगे। इसके लिए फेसबुक पर लोकेशन को डाल दिया गया है। वो यह भी कह रहे हैं कि देश और धर्म के लिए महाराणा सांगा ने 80 घाव खाए थे। उनका अंश और वंश होने के नाते दो घाव हम भी खा लेंगे। इसमें उन्होंने 11 बजे आगरा में कार्यकतार्ओं से आने का एलान किया था। यह भी कहा कि अगर, माफी मांगनी है तो राजस्थान के रूपवास में महाराणा सांगा के स्मारक पर जाकर नाक रगड़कर माफी मांगनी होगी। तभी माफ किया जाएगा। इसके अलावा अन्य तरीके से माफी नहीं दी जाएगी।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर हुए बवाल की घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। इसमें हरीपर्वत चौराहे पर बैरियर लगाकर कार्यकतार्ओं को रोकते पुलिसकर्मी का वीडियो भी है। लोग अपने कमेंट भी कर रहे हैं। वहीं घर के बाहर तोड़फोड़ और पुलिस के बल प्रयोग के भी वीडियो वायरल हैं।
रामजीलाल सुमन ने पत्र जारी कर दी सफाई
आगरा। सपा सांसद रामजीलाल सुमन की ओर से बुधवार को सुबह ही पत्र जारी करके सफाई दी गई है। इसमें लिखा है कि ‘मुझे दुख है कि मेरे वक्तव्य से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। जबकि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। मैं सभी जाति, वर्गों, संप्रदायों का सम्मान करता हूं। राजपूत समाज के गौरव की अनेक गाथाएं हैं। सामाजिक संरचना में उनका उल्लेखनीय योगदान है। राज्यसभा में वक्तव्य के दौरान उनके कहना का आशय यह था कि हमें इतिहास के दबे मुर्दों को पुनर्जीवित नहीं करना चाहिए। इसके विपरीत मेरे वक्तव्य की मूल भावना को छोड़कर अनेक विवाद उत्पन्न किए जा रहे हैं। मेरा राजनैतिक जीवन समाजवादी विचारधारा के मूल्यों के प्रति समर्पित रहा है। मेरा संसदीय क्षेत्र फिरोजाबाद, आगरा और पश्चिमी उप्र में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो यह कह सके कि मेरे द्वारा कभी जाति या धर्म की राजनीति की गई हो, या इस आधार पर किसी की मदद नहीं की गई। हमें इतिहास से सीख लेकर न्याय संगत समाज के निर्माण की दिशा में मिलकर कार्य करना चाहिए। न कि समाज में वैमनस्यता पैदा करनी चाहिए। यही मेरे बयान की मूल भावना थी। हमें भूलकात की घटनाओं को आज के पुलिस सामाजिक व्यवहार का आधार नहीं बनाना चाहिए।
इन सवालों के नहीं मिले उत्तर
-आखिर हमलावर को किसका संरक्षण था कि वह बेखौफ थे?
-जिले में निषेधाज्ञा लागू होने पर भी प्रदर्शन कैसे हो गया?
-करणी सेना के ऐलान के बाद क्या एक्शन लिया गया?
-प्रदर्शनकारी लंबा रास्ता तय कैसे एमजी रोड पहुंचे?
-उपद्रवियों की मंशा को खुफिया तंत्र क्यों नहीं भाप सकी?
-शहर में सीएम की मौजूदगी में उपद्रव कैसे हो गया?
