आगरा। प्रेम प्रसंग के चलते ही बांस-बल्ली व्यापारी की हत्या पत्नी ने प्रेमी व उसके साथी से कराई थी। आरोपितों ने शराब पिलाने के बाद गमछे से युवक का गला घोंट दिया था। इसके बाद शव को फरह क्षेत्र में झाड़ियों में फेंक दिया था। तीनों आरोपितों को जेल भेजा गया है। मंगलवार को एसीपी मयंक तिवारी प्रेसवार्ता कर मामले का खुलासा किया।
सिकंदरा रोड बोदला के रहने वाले जितेंद्र सिंह बघेल उर्फ गागा फर्नीचर कारीगर थे। 11 मार्च की शाम वह साले नेत्रपाल के बेटे राजा से फोन पर बात करते हुए घर से निकले थे। इसके बाद नहीं लौटे। 12 मार्च को उनका शव मथुरा के फरह थाना क्षेत्र के गांव भीम नगर स्थित झाड़ियों में पड़ा मिला था। 15 मार्च को स्वजन ने शव की शिनाख्त की थी। मंगलवार को प्रेसवार्ता कर एसीपी लोहमंडी मयंक तिवारी ने बताया कि जगदीशपुरा थाना पुलिस ने आरोपित पत्नी नीतू, कागारौल के नगला महासुख के रहने वाले प्रेमी विष्णु व उसके साथी एत्मादपुर के सिकतरा निवासी अनीश मोहम्मद उर्फ छोटू को न्यायालय से जेल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि हत्या की योजना पत्नी ने बनाई थी। 11 मार्च को ही बिचपुरी के पास प्रेमी विष्णु ने अपने साथी अनीश के साथ मिलकर शराब पिलाने के बाद कार में गमछे से जितेंद्र की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव का फरह क्षेत्र में फेंक दिया था। तीन आरोपितों ने अपना अपराध स्वीकार किया है। पुलिस के अनुसार आए दिन की मारपीट से परेशान होकर हत्या कराने की बात पत्नी ने पूछताछ में स्वीकार की है।
शक के दायरे में बेटे के आने पर हत्या का राज मृतक की सलहज ने ही खोला था। मृतक जितेंद्र के भाई मनोज ने बताया कि बड़े भाई की सलहज ने उनको बताया कि जितेंद्र की पत्नी नीतू ने उनकी हत्या करा दी है। मथुरा में जाकर जानकारी करो तो शायद कुछ मिल सकता है। वरना कुछ हाथ नहीं आने वाला है। इसके बाद 16 मार्च को वह फरह थाने पहुंचे और झाड़ियों में मिले शव की शिनाख्त जितेंद्र के रूप में की थी।
पुलिस को गुमराह करती रही पत्नी
जितेंद्र सिंह बघेल के लापता होने के बाद पत्नी नीतू पुलिस को गुमराह करती रही। योजना के तहत पत्नी ने बोदला चौराहे पर जितेंद्र के गुम होने के पोस्टर लगवाए थे। इसके साथ ही भतीजे राजा को जगदीशपुरा थाने भेजकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
नीतू की तीन साल पहले हुई थी विष्णु से मुलाकात
प्रभारी निरीक्षक जगदीशपुरा आनंद वीर सिंह ने बताया कि पत्नी नीतू की तीन साल पहले एंबुलेंस चालक विष्णु से मुलाकात हुई थी। उस वक्त नीतू के बेटे की आंख में चोट लगी थी। वह उसे इलाज के लिए विष्णु की एंबुलेंस से लेकर गई थी। इसी दौरान दोनों की मुलाकात धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में बदल गई।
