ट्रेन आने से पहले चेतवानी देकर सतर्क कर देगी रक्षक डिवाइस
आगरा। रेलवे के ट्रैक मेंटेनरों की जान रक्षक डिवाइस बचाएगी। यह डिवाइस ट्रेन आने से पहले उन्हें सतर्क कर देगी। रेलवे में डिवाइस की खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सर्दी के मौसम में पेट्रोलिंग का काम ट्रैक मेंटेनर के लिए जानलेवा होता है। कोहरे के चलते हर साल मंडल में औसतन चार ट्रैक मेंटेनर अपनी जान गंवा देते हैं। ऐसे इसलिए होता है कि पटरी पर चलते हुए उन्हें यह पता नहीं लग पाता कि वह जिस ट्रैक पर चल रहे हैं, ट्रेन भी उसी ट्रैक पर आ रही है। लेकिन अब ट्रैक मेंटेनरों की जान बचाने के लिए आधुनिक डिवाइस का इस्तेमाल किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी से पहले यह डिवाइस ट्रैक मेंटेनरों तक पहुंच जाएंगी। रेलवे ने अभी तक ट्रैक मेंटेनर को वह डिवाइस दी हैं, जिनसे यह पता लगता है कि वर्तमान में ट्रैक मेंटेनर कहां और किस सेक्शन में काम कर रहा है लेकिन यह डिवाइस उनकी जान बचाने के लिए नहीं हैं।
ऐसे काम करेगा
जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) आधारित रक्षक डिवाइस रेलवे की ट्रेन आगमन प्रणाली से जुड़ी होगी। वॉकीटॉकी की तरह दिखने वाली इस डिवाइस में तीन एलईडी लाइट होंगी। एक अप लाइन के लिए, दूसरा डाउन लाइन के लिए और तीसरी ट्रेन न होने के लिए होगा। यह डिवाइस ट्रेन के दो किलोमीटर नजदीक आने पर वल्ब के साथ बीप देने लगेगी। इसमें वही वल्ब जलेगा, जिस ट्रैक पर ट्रेन आ रही है। इससे ट्रैक मेंटेनर को जानकारी मिल जाएगी कि ट्रेन अप लाइन पर आ रही है या डाउन लाइन पर। ऐसे में वह ट्रैक से दस हट पाएंगे।
पटरी पर बढ़ी ट्रैक मेंटेनरों की पेट्रोलिंग
सर्दी के मौसम में रेल की पटरी चटकने के मामले बढ़ने लगते हैं। एक ट्रैक मेंटेनर को प्रतिदिन 16 किलोमीटर रेल लाइन पर चलना होगा। मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि सर्दी में रेल फ्रैक्चर अधिक होते हैं। ऐसे में रेल संरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रैक मेंटेनरों को पेट्रोलिंग के लिए तैनात कर दिया गया है।
