थाना एत्मादपुर का मामला, पीड़ित तीन बार मिला कमिश्नर से
तीन महीने बाद भी आईओ नही लगा पाया मामले में आख्या
स्थलीय निरीक्षण के बाद राजस्व विभाग की टीम लगा चुकी है अपनी रिपोर्ट
आगरा। एत्माददौला थाना क्षेत्र के प्रकाश नगर का रहने वाला संजय एत्मादपुर थाने के एक जांच अधिकारी की मनमानी के चलते घन चक्कर बनकर रह गया है। पीड़ित पुलिस आयुö के पास तीन बार चक्कर लगा चुका है। पुलिस आयुö भी जांच अधिकारी को आख्या भेजने की कह चुके हैं। लेकिन जांच अधिकारी जांच आख्या भेजने को तैयार नहीं है।
पीड़ित संजय के पिता स्व.भगवान दास और महेन्द्र सिंह खसरा संख्या 3061 मौजा नराइच प्रथम में सह खातेदार थे। महेन्द्र सिंह ने 29 जनवरी 2003 को अपने हिस्से की जमीन में से 200 वर्ग गज का मुख्तारमाना खास (पावर अटार्नी)शीला देवी पत्नी बालकिशन के नाम कर दी थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2004 में अपने भाग की सम्पूर्ण जायजाद का बैनामा प्रोपर्टी डेवलपमेंट के सचिव गुलाब सिंह पुत्र तेज सिंह के हक में कर दिया था। इसके बाद राजस्व अभिलेखों में से महेन्द्र सिंह का नाम खारिज करते हुए प्रोपर्टी डेवलपमेंट के सचिव गुलाब सिंह का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया था।
बस यहीं से शीला देवी की नीयत में खोट आ गया। उक्त सभी जायदाद का बैनामा गुलाब सिंह के पक्ष में होने की जानकारी होते हुए भी शीला देवी ने षडयंत्र रचा। उसने अपने पति बालकिशन और पुत्र के साथ मिलकर 200 वर्ग गज जमीन का बैनामा तीन अन्य लोगों के नाम अपनी पैतृक(विरासत) की भूमि बताकर खसरा संख्या 3061 में से 2018 में बैनामा कर दिया।
जबकि शीला देवी के पति बालकिशन की पैतृक भूमि खसरा संख्या 3055 में है। जिसमें बालकिशन का नाम दर्ज है। जब इस मामले की जानकारी पीड़ित संजय को हुई तो उसने उप जिलाधिकारी एत्मादपुर के यहां शिाकयत दर्ज कराई। उप जिलाधिकारी ने तहसीलदार नायब तहसीलदार लेखपाल से स्थलीय निरीक्षण कर आख्या मांगी। राजस्व टीम ने स्थलीय निरीक्षण की जांच में पाया कि पीड़ित द्वारा लगाये आरोपों को सही पाया। मामले में उप जिलाधिकारी ने संबंधित थाने को आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया।
क्या कहती है राजस्व टीम की जांच
पीड़ित संजय के पिता भगवान दास का मौजा नरायच तहसील एत्मादपुर आगरा में सह खातेदार है। प्रार्थी की उö जायजाद में सह खातेदार महेन्द्र सिह ने शीला देवी पत्नी बाल किशन के हक में दिनांक-29/01/2003 को अपने भाग 1/10 में से 200 वर्ग गज का मुख्तरनामा खास (पावर अटार्नी) निष्पादित किया था। फिर महेन्द्र सिह ने दिनांक 13/06/2004 को खसरा सं0-3061 में से अपने भाग 1/10 की सम्पूर्ण जायजाद का बैनामा प्रोपर्टी डेवलपमेंट के सचिव गुलाब सिंह पुत्र तेज सिंह के हक में निष्पादित कर दिया था। महेन्द्र सिंह द्वारा किये गये बैनामे के आधार पर राजस्व अभिलेखो में से महेन्द्र सिंह का नाम खारिज करते हुए प्रोपर्टी डेवलपमेंट के सचिव गुलाब सिंह का नाम राजस्व अभिलेखो में दर्ज हो गया था। इसके बाद मुख्तारनामा धारक शीलादेवी ने मुख्तारनामा में अंकित 200 वर्ग गज में से 100 वर्ग गज भूमि का बैनामा 20/6/2018 को क्रेता प्रेम राठौर को और 50-50 वर्ग गज दो बैनामे 26/9/2018 को के्रतागण पूनम राठौर और मीरा देवी के नाम अपनी पैतृक संपत्ति दर्शा कर किये गये है। प्रशंगत गाटा संख्या 3061 मि. रकवा 2.6350है. में से खातेदार महेन्द्र सिंह पुत्र रामकिशन द्वारा दिनांक 13/6/2004 को अपने संम्पूर्ण अंश 1/10 भाग का विक्रय करने के बाद खातेदार का कोई विधिक अंश (जमीन) शेष नहीं है। नायब तहसीलदार ने स्थलीय जांच में पाया कि मौके पर मुख्तारनामा में अंकित जमीन और बेची गई जमीन के चौहद्दी(दिशाए/ भुजाएं) अलग-अलग है।
अधिवक्ता की राय
मामले में अधिवक्ता शशी कुमार उपाध्याय का कहना है कि नियमानुसार जांच अधिकारी को नियमित समय में दोनों पक्षों के बयान दर्ज कराकर अपनी आख्या लगानी होती है। लेकिन जांच अधिकारी अपने निजी लाभ या प्रार्थी को परेशान करने के चलते जांच को महीनों लटका देते है। जो नियम विरुद्ध है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को भी जांच अधिकारियों की कार्यशैली पर जबाब तलब करना चाहिए। -अधिवक्ता शशी कुमार उपाध्याय।
