मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास की खंडपीठ ने आगरा के प्रो. नवनीत यादव की याचिका पर मांगा ब्यौरा
आगरा। सीएम योगी ने आगरा सहित प्रदेशभर में संचालित फर्जी विद्यालयों पर तालाबंदी के निर्देश दिए थे । इसके बाद आगरा में चल रहे फर्जी विद्यालयों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। आगरा के 29 फर्जी विद्यालयों को बंद करा दिया गया। 100 विद्यालयों को नोटिस भी जारी किए गए । मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक महेश चंद ने विद्यालय संचालकों पर जुमार्ने की कार्रवाई के लिए बीएसए को निर्देश दिए ,लेकिन इसके बाद भी आगरा में फर्जी विद्यालय संचालित हैं।
अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा में बिना मान्यता व मानकों को दरकिनार कर धड़ल्ले से चल रहे स्कूलों पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार से इनके खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास की खंडपीठ ने आगरा के प्रो. नवनीत यादव की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता राम कृष्ण यादव ने दलील दी कि आगरा में बड़ी संख्या में गैर मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित हो रहे हैं। महंगी फीस संग संचालित ऐसे स्कूलों के पास सरकारी मानक के अनुरूप आधारभूत ढांचा भी नहीं है। बतौर बानगी बमरौली कटरा में डीआर इंटरनेशनल स्कूल में बिना मान्यता के कक्षा नौ तक की पढ़ाई कराई जा रही है। साथ ही इंटर तक बच्चों का प्रवेश भी लिया जा रहा है। इसके अलावा आरोप है कि अग्निशमन विभाग ने भी इसे एनओसी नहीं दी है। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग, आगरा के मंडलायुक्त से शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में यही भी बताया गया कि स्थानीय निवासी रीता ने भी आगरा के लिटिल एजेंल पब्लिक स्कूल, एसगी पब्लिक स्कूल, एमएस पब्लिक स्कूल के खिलाफ बेसिक शिक्षा निदेशालय में शिकायत दर्ज कराई है।
प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट बताया गया कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने विस्तृत ब्योरा 12 जुलाई तक पेश करने का आदेश दिया है। दूसरी तरफ डीआर इंटरनेशनल स्कूल की ओर से याचिका की पोषणीयता और याची की विधिक हैसियत पर सवाल उठाया गया है।
