कार्रवाई न होने से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद अधिकारी और बाबू दबाकर बैठ जाते हैं पत्रावली
श्रीमती विमला देवी इंटर कॉलेज में फर्जी नियुक्ति पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं
आगरा। श्रीमती विमला देवी इंटर कॉलेज गढ़ीरामी में 31 वर्ष पूर्व कूटरचना तथा तथ्यों के गोपन के सहारे 1992 से जितेन्द्र सिंह परमार की चौकीदार पद पर नियुक्ति दशार्यी गई । नियुक्ति को लेकर फर्जीवाड़े के प्रकाश में आने के बाद भी न तो डीआईओएस आगरा द्वारा और न ही जेडी आगरा द्वारा अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है।
बताते चलें कि तत्कालीन डीआईओएस आगरा महावीर प्रसाद वर्मा ने शासनादेश संख्या मा 2/ 1005- 7005 /7119/ 1991-92 दिनांक 23-8-1991 के आधार पर, आदेश पत्र दिनांक 12-2-1992 तथा 25-2-1992 के द्वारा यह कहकर अमान्य कर दिया था कि उक्त शासनादेश के आलोक में विद्यालय का रिक्त पद मृतक आश्रित खावर फरीदी पुत्र स्व. मोईन फरीदी से भरा जाएगा। जिसके फलस्वरूप जितेन्द्र सिंह परमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या 30968/1992 दाखिल की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश दिनांक 21-5-1993 द्वारा रोक लगा दी, किन्तु दिनांक 25-11-1993 को अंतिम सुनवाई करते हुए माननीय न्यायायल ने दिनांक 21-5-1993 को जारी अपने अंतरिम आदेश को समाप्त करते हुए।
जितेन्द्र सिंह परमार प्रकरण पर डीआईओएस आगरा द्वारा जारी आदेश दोनों आदेशों को सही मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया। रोचक बात यह है कि जितेन्द्र सिंह परमार द्वारा कोर्ट के 25-11-1993 अंतिम आदेश को छिपा कर दिनांक 21-5-1993 अंतरिम आदेश की कॉपी दिखाकर लगातार पदोन्नतियाँ प्राप्त की जाती रही। इसका खुलासा तब हुआ जब प्रबन्ध समिति द्वारा कार्यवाहक प्रधानाचार्य राजीव कुमार को बच्चों से 10 लाख रुपये से अधिक अवैध फीस वसूली व धन के गबन आदि आरोपों में निलंबित कर कृष्ण पाल सिंह को नया प्रधानाचार्य बनाया गया। जिसके बाद प्रबन्ध समिति ने जितेन्द्र सिंह परमार को भी दिनांक 2-7-2023 को निलंबित कर जांच बैठा दी।
किन्तु डीआईओएस आगरा दिनेश कुमार द्वारा तथ्यों का परीक्षण किए बिना ही बहाली आदेश जारी कर दिया गया। यहां सबसे हैरान करने की बात यह है कि जब कोर्ट द्वारा जितेन्द्र सिंह परमार की याचिका को दिनांक 25-11-1993 को खारिज कर दिया गया था, तो फिर डीआईओएस आगरा द्वारा उसी याचिका संख्या 30968/1992 के आधार पर 21-5-1994 को वेतन का आदेश पत्र कैसे जारी कर दिया गया। अगर गहराई से जांच की गई तो तमाम की गर्दन फं सेगी।
जितेन्द्र सिंह परमार के खिलाफ कोई कार्यवाही न किये जाने पर प्रबन्धक दीपक सिंह द्वारा शिक्षा निदेशक (माध्यमिक),अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक) तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को सभी साक्ष्य व सुबूत भेजे गए।
शिकायत पर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) प्रयागराज के पत्रांक: सामान्य (1) द्वितीय 4535 / 2023-24 दिनांक 6-2-2024 द्वारा मण्डलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा से फर्जी नियुक्ति पर यथोचित कार्यवाही करने का आदेश दिया गया था। किन्तु अभी तक न तो वेतन रोकने की कार्यवाही की गई है और न ही कोई जांच बैठाई गई है। अधिकारी मामला कोर्ट में होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। ऊपर से आने वाले सभी पत्रों को कार्यालय के अधिकारी और बाबू मिलीभगत से दबाकर बैठ जाते हैं। आगरा जिले में यह खेल वर्षों से खेला जा रहा है। किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही न होने से सभी भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
